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indigo flight : Why Are So Many Indigo Flights Getting Cancelled? पूरा मामला सरल भाषा में समझिए – Part 1)

indigo flight : पूरा मामला सरल भाषा में समझिए – Part 1)

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एक बड़ा सवाल, एक और भी बड़ा संकट

indigo flight : भारत ने कुछ साल पहले एक सपना देखा था — “हवाई चप्पल पहनने वाला भी हवाई जहाज़ में बैठेगा।”
यह सिर्फ एक लाइन नहीं, बल्कि लाखों मध्यमवर्गीय और निम्नवर्गीय परिवारों की उम्मीद थी। लेकिन आज हालात उलटे हैं। देश के कई एयरपोर्ट रेलवेस्टेशन और बस स्टैंड से भी बदतर स्थिति में दिख रहे हैं। फर्क बस इतना है कि यहाँ सामान महंगा है, टिकट महंगे हैं — और बेबस लोग भी महंगे कपड़ों में दिखते हैं।

एयरपोर्ट जो कभी सपनों की जगह थे, आज परेशानी का अड्डा बने हुए हैं

एयरपोर्ट की चमचमाती फर्श पर लोग चादर बनाकर नहीं, थककर लेटे हुए हैं।
कहीं एक गर्भवती महिला दर्द से कराह रही है…
कहीं एक पिता अपनी बेटी के लिए सैनिटरी पैड माँगने पर मजबूर है…
कहीं एक यात्री अपने पिता की राख लिए बैठा है — “बस एक उड़ान मिल जाए, हरिद्वार जाकर अंतिम संस्कार करना है…”

यह दृश्य किसी फिल्म का नहीं, इंडिगो के फ्लाइट कैंसिलेशन संकट के बीच का भारत है।

पिछले 5–7 दिनों में हुआ क्या?

3 दिसंबर 2025 की सुबह जैसे ही लोगों ने मोबाइल देखा, एक नोटिफिकेशन चमक रहा था:

“Your flight has been delayed due to operational reasons.”
कुछ देर बाद: Another Delay.
फिर: Cancelled.

और फिर तो मानो बाढ़ आ गई —

लोग 24 घंटे नहीं, 72-90 घंटे तक एयरपोर्ट की फर्श पर पड़े रहे।
ना खाना, ना पानी, ना कंबल…
सिर्फ एक शब्द — CANCELLED

क्या यह कोई तकनीकी गड़बड़ थी? मौसम खराब? सिस्टम फेल?

→ नहीं। यह इंडिगो की एक सोची-समझी चाल थी।**

यहाँ से कहानी और दिलचस्प और डरावनी दोनों हो जाती है।

DGCA ने जुलाई 2025 में पायलटों के लिए नए सुरक्षा नियम बनाए:

ये नियम जरूरी थे। अहमदाबाद जैसे हादसों के बाद सरकार थके हुए पायलटों को उड़ान भराने का जोखिम नहीं लेना चाहती थी।

एयर इंडिया ने नए पायलट भर्ती किए
विस्तारा ने किए
अकासा ने भी किए
यहाँ तक कि स्पाइसजेट ने भी…

लेकिन इंडिगो ने कुछ नहीं किया।

क्यों?

क्योंकि इंडिगो का पूरा बिजनेस मॉडल कम स्टाफ और ज्यादा उड़ानों पर आधारित है।

इंडिगो के पास इतने कम पायलट क्यों?

यही तो असली खेल है।**

और वही विमान दिन में 5–6 उड़ानें करता है।
कल्पना कीजिए — पायलट इंसान हैं या मशीन?

सालों से पायलट मांग कर रहे थे, “थकान सीमा कम करो, हमें आराम चाहिए।”

लेकिन कंपनी का जवाब था:
“नियम ऐसे ही रहेंगे। वरना छोड़ दो नौकरी।”

नए नियमों का मतलब था — इंडिगो को हजारों नए पायलट भर्ती करने पड़ते।

और यही बात उन्हें मंज़ूर नहीं थी।**

तो उन्होंने दूसरा रास्ता चुना:

ब्लैकमेल।

धीरे-धीरे नवंबर से फ्लाइटें कैंसिल करनी शुरू हुईं।
दिसंबर का पीक सीज़न आते ही —
एक झटके में सैकड़ों फ्लाइटें रद्द।

देशभर के एयरपोर्ट पर अफरातफरी मच गई।
दूसरी एयरलाइंस स्लॉट नहीं ले सकती थीं
क्योंकि इंडिगो के स्लॉट ब्लॉक थे।

बाकी कंपनियों ने टिकट 8–10 गुना कर दिए।
एक टिकट जो 4000 का था, 40,000 तक पहुँच गया।

लोग मजबूर होकर—

और फिर सरकार झुक गई।

7 दिसंबर को नागरिक उड्डयन मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की:

“यात्रियों की असुविधा को देखते हुए नए नियमों को अगले आदेश तक स्थगित किया जाता है।”

मतलब:
पायलटों की सुरक्षा → रोक दी गई
यात्रियों की सुरक्षा → रोक दी गई
ग्लोबल मानक → रोक दिए गए

और किसके दबाव में?
एक प्राइवेट कंपनी — इंडिगो — के दबाव में।

यह सिर्फ इंडिगो की जीत नहीं थी

यह भारत के सिस्टम की हार थी।

यह साबित करता है कि—

तो वह 5 दिन में नियम बदलवा सकती है,
सरकार को पीछे हटने पर मजबूर कर सकती है।

लेकिन हार किसकी हुई?

इन सबके दर्द के आगे
कंपनी ने सिर्फ कहा: “हमें खेद है।”

इस आर्टिकल का भाग 2 इस 👇आर्टिकल मे आप पढ़ सकते है।

PART 2 : क्यों रद्द हो रही हैं इतनी सारी Indigo Flights? पूरा सच, पूरी कहानी – विस्तार से समझिए

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